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काश इक रोज़ घर मेरे ग़ौस-उल-वरा आप तशरीफ़ लाएँ तो क्या पूछना / Kash Ek Roz Ghar Mere Ghaus-ul-wara Aap Tashreef Layein To Kya Poochhna

काश ! इक रोज़ घर मेरे, ग़ौस-उल-वरा ! आप तशरीफ़ लाएँ तो क्या पूछना अपने नूरानी क़दमों से घर को मेरे आ के जन्नत बनाएँ तो क्या पूछना ग़ौस-ए-आ'ज़म ने मुझ पे करम ये किया मुझ से 'आसी को रौज़े पे बुलवा लिया अब इन्हीं जालियों में मुझे एक दिन अपना जल्वा दिखाएँ तो क्या पूछना एक दिन जब सजे महफ़िल-ए-मुस्तफ़ा ग़ौस-ए-आ'ज़म हों और हों सभी औलिया मैं पढ़ूँ झूम के ना'त सरकार की सुन के वो मुस्कुराएँ तो क्या पूछना ये जिगर हो या सर हो या हो चश्म-ए-नम आप ने तो किए हैं सभी पे करम अब ज़रा मेरे दिल पे भी रख दें क़दम दिल मेरा जगमगाए तो क्या पूछना जाम 'इरफ़ान का बहर-ए-'इरफ़ान से क़ुत्ब-ओ-अब्दाल आते हैं पीने जिसे काश गुलज़ार ! मुझ को भी इक दिन वही जाम भर कर पिलाएँ तो क्या पूछना शायर: सय्यिद शाह गुलज़ार इस्माईल वास्ती क़ादरी ना'त-ख़्वाँ: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी kaash ! ik roz ghar mere, Gaus-ul-wara ! aap tashreef laae.n to kya poochhna apne nooraani qadmo.n se ghar ko mere aa ke jannat banaae.n to kya poochhna Gaus-e-aa'zam ne mujh pe karam ye kiya mu...

मज़हर-ए-नूर-ए-ख़ुदा सरकार ताज-उल-औलिया / Mazhar-e-Noor-e-Khuda Sarkar Taj-ul-Auliya

मज़हर-ए-नूर-ए-ख़ुदा सरकार ताज-उल-औलिया जल्वा-ए-शम्सुद्दुहा सरकार ताज-उल-औलिया मालिक-ए-'इल्म-ए-लदुन्नी, पैकर-ए-सब्र-ओ-रज़ा तेवर-ए-शेर-ए-ख़ुदा सरकार ताज-उल-औलिया रौशनी जिस की विलायत की है फैली चार-सू वो चराग़-ए-फ़ातिमा सरकार ताज-उल-औलिया ज़ोहद-ओ-तक़्वा, पारसाई में यक़ीनन आप हैं नाइब-ए-ग़ौस-उल-वरा, सरकार ताज-उल-औलिया ! बैठे बैठे ही करा देते हैं का'बे का तवाफ़ जान लो इस से है क्या सरकार ताज-उल-औलिया अपने मँगतों को कभी मायूस लौटाते नहीं मम्बा'-ए-जूद-ओ-सख़ा सरकार ताज-उल-औलिया जिस तरफ़ भी देखिए है 'उर्स-ए-सद-साला की धूम मरहबा सद मरहबा सरकार ताज-उल-औलिया बटता है शाम-ओ-सहर फ़ैज़ान ग़ौस-ए-पाक का ऐसा है रौज़ा तेरा, सरकार ताज-उल-औलिया ! भीक लेने आए हैं मँगते तेरे दरबार में हो करम सब पर शहा सरकार ताज-उल-औलिया ! नाज़ कर अपने मुक़द्दर पर, ऐ शहर-ए-नागपुर ! तुझ में है जल्वा-नुमा सरकार ताज-उल-औलिया हश्र तक फूले-फले ये मस्लक-ए-अहमद-रज़ा है यही दिल की दु'आ, सरकार ताज-उल-औलिया ! हर तरफ़ फैली है जो गुलज़ार की ये निकहतें आप ही की है 'अता, सरकार ताज-उल-औलिया ! शायर: सय्यिद शाह गु...

कौन कहता है कि कर्बल में नहीं था पानी / Kaun Kehta Hai Ki Karbal Mein Nahi Tha Paani

कौन कहता है कि कर्बल में नहीं था पानी कर्बला वालों ने ख़ुद ही नहीं चाहा पानी अपने होंटो को हिला देते जो इब्न-ए-हैदर आसमानों से उसी वक़्त बरसता पानी वो ख़ुदा ने तुम्हें, शब्बीर ! दिया है रुत्बा तुम अगर चाहते तो ख़ुल्द से आता पानी 'आलम-ए-तिफ़ली में ये आप की ग़ैरत, असग़र ! जान तो दे दी मगर मुँह से न माँगा पानी ना'त-ख़्वाँ: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी kaun kehta hai ki karbal me.n nahi.n tha paani karbala waalo.n ne KHud hi nahi.n chaaha paani apne honTo.n ko hila dete jo ibn-e-haidar aasmaano.n se usi waqt barasta paani wo KHuda ne tumhe.n, shabbir ! diya hai rutba tum agar chaahte to KHuld se aata paani 'aalam-e-tifli me.n ye aap ki Gairat, asGar ! jaan to de di magar munh se na maanga paani Naat-Khwaan: Sayyed Abdul Wasi Qadri Razavi हिन्दी ENG اردو

शुजाअत नाज़ करती है जलालत नाज़ करती है / Shujaat Naaz Karti Hai Jalalat Naaz Karti Hai

शुजा'अत नाज़ करती है, जलालत नाज़ करती है वो सुल्तान-ए-ज़माँ हैं, उन पे शौकत नाज़ करती है सदाक़त नाज़ करती है, अमानत नाज़ करती है हमिय्यत नाज़ करती है, मुरव्वत नाज़ करती है शह-ए-ख़ूबाँ पे हर ख़ूबी-ओ-ख़स्लत नाज़ करती है करीम ऐसे हैं वो उन पर करामत नाज़ करती है जहान-ए-हुस्न में भी कुछ निराली शान है उन की नबी के गुल पे गुलज़ारों की ज़ीनत नाज़ करती है शहंशाह-ए-शहीदाँ हो, अनोखी शान वाले हो हुसैन इब्न-ए-'अली ! तुम पर शहादत नाज़ करती है बिठा कर शाना-ए-अक़दस पे कर दी शान दो-बाला नबी के लाडलों पर हर फ़ज़ीलत नाज़ करती है ज़बीन-ए-नाज़ उन की जल्वा-गाह-ए-हुस्न है किस की रुख़-ए-ज़ेबा पे हज़रत की मलाहत नाज़ करती है निगाह-ए-नाज़ से नक़्शा बदल देते हैं 'आलम का अदा-ए-सरवर-ए-ख़ूबाँ पे नुदरत नाज़ करती है फ़िदाई हूँ तो किस का हूँ, कोई देखे मेरी क़िस्मत क़दम पर जिस हसीं की जान-ए-तल'अत नाज़ करती है ख़ुदा के फ़ज़्ल से, अख़्तर ! मैं उन का नाम-लेवा हूँ मैं हूँ क़िस्मत पे नाज़ाँ, मुझ पे क़िस्मत नाज़ करती है शायर: मुफ़्ती अख़्तर रज़ा ख़ान ना'त-ख़्वाँ: साबिर रज़ा अज़हरी सुरत सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी वासिफ़ रज़ा नूरी...

कौन है जो ये इल्तिजा न करे | दिल को उन से ख़ुदा जुदा न करे तज़मीन के साथ / Kaun Hai Jo Ye Iltija Na Kare | Dil Ko Un Se Khuda Juda Na Kare With Tazmeen

कौन है जो ये इल्तिजा न करे कौन उन के लिए मरा न करे कौन रो रो के ये दु'आ न करे दिल को उन से ख़ुदा जुदा न करे बेकसी लूट ले ख़ुदा न करे 'इश्क़ का सर पे डाल कर के ग़िलाफ़ बात अहल-ए-ख़िरद ये सुन लें साफ़ काम है कौन सा शरा' के ख़िलाफ़ इस में रौज़े का सज्दा हो कि तवाफ़ होश में जो न हो वो क्या न करे रात-दिन हम गुनह में डूबे हैं जुर्म जितने हैं सारे करते हैं फिर भी आक़ा करीम ऐसे हैं ये वही हैं कि बख़्श देते हैं कौन इन जुर्मों पर सज़ा न करे 'इश्क़ ने कर दिया मुझे मशहूर उन की यादों से ज़ेहन है मा'मूर मुझ को इस बात पे है फ़ख़्र ज़रूर दिल में रौशन है शम'-ए-'इश्क़-ए-हुज़ूर काश ! जोश-ए-हवस हवा न करे ज़ख़्म सीने के सारे सीने को जो यहाँ मर रहे थे जीने को ऐ वसी ! जाम-ए-'इश्क़ पीने को ले, रज़ा ! सब चले मदीने को मैं न जाऊँ अरे ख़ुदा न करे कलाम: इमाम अहमद रज़ा ख़ान तज़मीन: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी ना'त-ख़्वाँ: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी kaun hai jo ye iltija na kare kaun un ke liye mara na kare kaun ro ro ke ye du'aa na kare dil ko un se...

बे-तलब भीक यहाँ मिलती है आते जाते | ये वो दर है कि जहाँ दिल नहीं तोड़े जाते / Betalab Bheek Yahan Milti Hai Aate Jate | Ye Wo Dar Hai Jahan Dil Nahin Tode Jate

बे-तलब भीक यहाँ मिलती है आते जाते ये वो दर है कि जहाँ दिल नहीं तोड़े जाते ये है आक़ा की 'इनायत, वो करम करते हैं वर्ना हम जैसे कहाँ दर पे बुलाए जाते वो मेरे दिल के धड़कने की सदा सुनते हैं इस लिए लफ़्ज़ ज़ुबाँ पर नहीं लाए जाते उन की दहलीज़ के मँगते हैं, बड़ी मौज में हैं हम से अग़्यार के टुकड़े नहीं खाए जाते ये तो सरकार की रहमत ने हमें थाम लिया वर्ना दर दर पे यूँही ठोकरें खाए जाते वो निक़ाब-ए-रुख़-ए-रौशन जो उठाते जाते मेरी बिगड़ी हुई तक़दीर बनाते जाते काश ! अपना भी मदीने में कोई घर होता देखते रौज़ा-ए-सरकार को आते जाते शहर-ए-सरकार की हम ख़ाक के ज़र्रे होते आप की राह में बिखरे हुए पाए जाते अपना मदफ़न भी मुक़द्दर से जो बन जाता बक़ी' हश्र में आप के क़दमों से उठाए जाते क़ाफ़िले वालो ! ज़रा ठहरो, मैं आता हूँ अभी एक और ना'त सुना लूँ उन्हें जाते जाते शम्मा'-ए-दीन न इस शान से रौशन होती ख़ून-ए-असग़र से न गर दीप जलाए जाते हम कहाँ होते, कहाँ होती ये महफ़िल, अल्ताफ़ ! ख़ाक-ए-कर्बल पे अगर सर न कटाए जाते शायर: सय्यिद अल्ताफ़ शाह काज़मी ना'त-ख़्वाँ: सय्यिद अल्ताफ़ शाह काज़मी ख़ालिद हसनैन...

कोई सौ बार पूछे मैं कहूँ हर बार काफ़ी है / Koi Sau Baar Poochhe Main Kahun Har Baar Kafi Hai

कोई सौ बार पूछे, मैं कहूँ हर बार काफ़ी है मैं दीवाना हूँ, मुझ को बस तेरा दीदार काफ़ी है मसीहा-ए-ज़माना ने किया वापस मुझे कह कर मरीज़-ए-यार ! जा तुझ को निगाह-ए-यार काफ़ी है पहुँच कर तेरी चौखट पर तेरा दीवाना कहता है मुझे जन्नत से क्या लेना, तेरा दरबार काफ़ी है ज़माने के हर इक मरहब को मिट्टी में मिलाना हो सर-ए-मैदाँ ख़याल-ए-हैदर-ए-कर्रार काफ़ी है लिखी ना'त-ए-नबी फाँसी का फंदा चूम कर जिस ने वो हिन्दुस्तान का शा'इर क़तील-ए-दार काफ़ी है सिखाया जो वज़ीफ़ा वालिदा ने ग़ौस-ए-आ'ज़म को ग़ुलामो ! काफ़ी काफ़ी की यही तकरार काफ़ी है जो ग़द्दार-ए-नबी को ज़ेर करना हो, वसी ! फिर तो इमाम अहमद रज़ा के नाम का इक वार काफ़ी है शायर: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी ना'त-ख़्वाँ: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी koi sau baar poochhe, mai.n kahu.n har baar kaafi hai mai.n deewana hu.n, mujh ko bas tera deedaar kaafi hai maseeha-e-zamaana ne kiya waapas mujhe keh kar mareez-e-yaar ! jaa tujh ko nigaah-e-yaar kaafi hai pahunch kar teri chaukhaT par tera deewana kehta hai mujhe jannat se kya ...

नबियों में रसूलों में तेरी ज़ात अलग है / Nabiyon Mein Rasoolon Mein Teri Zaat Alag Hai

नबियों में रसूलों में तेरी ज़ात अलग है ऐ सरवर-ए-कौनैन ! तेरी बात अलग है इक टुकड़े पे हो जाएगा नस्लों का गुज़ारा सरकार के दरबार की ख़ैरात अलग है रातें तो मुबारक हैं बहुत और भी लेकिन मे'राज की जो रात है वो रात अलग है ये सच है कोई तूर का मेहमान बना था महबूब-ओ-मुहिब की तो मुलाक़ात अलग है मूसा को तजल्ली से नवाज़ा गया बेशक आक़ा पे 'इनायात की बरसात अलग है यूँ धूम मचाया हो कोई और तो बोलो मे'राज के उस दूल्हे की बारात अलग है नामूस-ए-रिसालत पे फ़ना कर दिया ख़ुद को अहमद रज़ा के 'इश्क़ में कुछ बात अलग है ना'रा तो लगाते हैं बहुत लोग रज़ा का गुलज़ार ! मेरे ना'रों में जज़्बात अलग है शायर: सय्यिद शाह गुलज़ार इस्माइल वास्ती क़ादरी (गुलज़ार-ए-मिल्लत) ना'त-ख़्वाँ: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी nabiyo.n me.n rasoolo.n me.n teri zaat alag hai ai sarwar-e-kaunain ! teri baat alag hai ik Tuk.De pe ho jaaega naslo.n ka guzaara sarkaar ke darbaar ki KHairaat alag hai raate.n to mubaarak hai.n bahut aur bhi lekin me'raaj ki jo raat hai wo raat alag ha...

इमामों में इक इमाम-ए-बरतर इमाम-ए-जाफ़र इमाम-ए-जाफ़र / Imamon Mein Ek Imam-e-Bartar Imam-e-Jafar Imam-e-Jafar

इमामों में इक इमाम-ए-बरतर इमाम-ए-जा'फ़र इमाम जा'फ़र 'अली के गुलशन के हैं गुल-ए-तर इमाम-ए-जा'फ़र इमाम-ए-जा'फ़र वो लख़्त-ए-जिगर-ए-बतूल भी हैं, वो बाग़-ए-ज़हरा के फूल भी हैं शुजा'अतों के 'अज़ीम पैकर इमाम-ए-जा'फ़र इमाम-ए-जा'फ़र इमाम-ए-आ'ज़म अबू-हनीफ़ा तुम्हारी सोहबत से बहरा-वर थे वो करते थे इस का ज़िक्र अक्सर, इमाम-ए-जा'फ़र ! इमाम-ए-जा'फ़र ! तुम्हारी 'इज़्ज़त, तुम्हारी शोहरत, तुम्हारी 'अज़मत, तुम्हारी रिफ़'अत नियाज़ तेरी हो क्यूँ न घर-घर, इमाम-ए-जा'फ़र ! इमाम-ए-जा'फ़र ! वसी पे नज़र-ए-करम ख़ुदा-रा, नसब की निस्बत की लाज रख ले हर एक मंज़िल के तुम हो रहबर, इमाम-ए-जा'फ़र ! इमाम-ए-जा'फ़र ! शायर: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी ना'त-ख़्वाँ: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी imaamo.n me.n ik imaam-e-bartar imaam-e-jaa'far imaam-e-jaa'far 'ali ke gulshan ke hai.n gul-e-tar imaam-e-jaa'far imaam-e-jaa'far wo laKHt-e-jigar-e-batool bhi hai.n wo baaG-e-zahra ke phool bhi hai.n shujaa'ato.n ke '...

वो बन में क़दम रख दें तो बन जाता है बन फूल | सर-ता-ब-क़दम है तन-ए-सुल्तान-ए-ज़मन फूल तज़मीन के साथ / Wo Ban Mein Qadam Rakh Den To Ban Jata Hai Ban Phool | Sar-Ta-Ba-Qadam Hai Tan-e-Sultan-e-Zaman Phool With Tazmeen

Wo Ban Me Qadam Rakh De To Ban Jata Hai Ban Phool Lyrics in Hindi & English वो बन में क़दम रख दें तो बन जाता है बन फूल जिस फूल को वो छू लें वो हो रश्क-ए-चमन फूल मैं क्यूँ कहूँ कि सिर्फ़ है आक़ा का दहन फूल सर-ता-ब-क़दम है तन-ए-सुल्तान-ए-ज़मन फूल लब फूल दहन फूल ज़क़न फूल बदन फूल आराम गुनहगार को इक पल नहीं मिलता सर से मेरे आलाम का सूरज नहीं ढलता मैं क्या करूँ, सरकार ! मेरा बस नहीं चलता तिनका भी हमारे तो हिलाए नहीं हिलता तुम चाहो तो हो जाए अभी कोह-ए-मिहन फूल अल्लाह ने सरकार की वो शान बनाई वल्लाह कोई कर नहीं सकता है बड़ाई हैरान हुई देख के ये सारी ख़ुदाई दंदान-ओ-लब-ओ-ज़ुल्फ़-ओ-रुख़-ए-शह के फ़िदाई हैं दुर्र-ए-'अदन, ला'ल-ए-यमन, मुश्क-ए-ख़ुतन, फूल ऐ मालिक-ए-कुल, रश्क-ए-जहाँ, शाह-ए-रसूलाँ महबूब-ए-ख़ुदा, नूर-ए-ख़ुदा, रहमत-ए-यज़्दाँ है 'अर्ज़ की अहबाब न हों मुझ से परेशाँ हों बार-ए-गुनह से न ख़जिल दोश-ए-'अज़ीज़ाँ लिल्लाह मेरी ना'श कर, ऐ जान-ए-चमन फूल कहता है बशर अपनी तरह वो है कमीना दिखलाओ उसे शहर-ए-बरेली का क़रीना उस 'आशिक़-ए-सादिक़ ने बड़ी बात कही ना वल्लाह जो मिल जाए ...

दिल में उल्फ़त हसन हुसैन की है / Dil Mein Ulfat Hasan Hussain Ki Hai

Dil Mein Ulfat Hasan Hussain Ki Hai Lyrics in Hindi & English दिल में उल्फ़त हसन हुसैन की है ये 'इनायत हसन हुसैन की है दोनों मालिक हैं पूरी जन्नत के या'नी जन्नत हसन हुसैन की है क्यूँ लुटाऊँ न नाम पर उन के सारी दौलत हसन हुसैन की है 'अक्स दोनों हैं अपने नाना के क्या शबाहत हसन हुसैन की है ले के जाएगी सीधा जन्नत में क्या मोहब्बत हसन हुसैन की है नाम पर उन के जान भी दे दूँ ये अमानत हसन हुसैन की है इक मुसल्ले पे, एक नेज़े पर क्या तिलावत हसन हुसैन की है ख़ुश-नसीबी है, ऐ वसी ! तेरी लब पे मिदहत हसन हुसैन की है शायर: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी ना'त-ख़्वाँ: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी dil me.n ulfat hasan husain ki hai ye 'inaayat hasan husain ki hai dono.n maalik hai.n poori jannat ke yaa'ni jannat hasan husain ki hai kyu.n luTaau.n na naam par un ke saari daulat hasan husain ki hai 'aks dono.n hai.n apne naana ke kya shabaahat hasan husain ki hai le ke jaa.egi seedha jannat me.n kya mohabbat hasan husain ki hai naam par un k...

या नबी नुस्ख़ा-ए-तस्ख़ीर को मैं जान गया / Ya Nabi Nuskha-e-Taskheer Ko Main Jaan Gaya

Ya Nabi Nuskha-e-Taskheer Ko Main Jaan Gaya Lyrics in Hindi & English या नबी ! नुस्ख़ा-ए-तस्ख़ीर को मैं जान गया उस को सब मान गए, आप को जो मान गया हर मकाँ वाले को करता हुआ हैरान गया ला-मकाँ में मेरा पैग़ंबर-ए-ज़ीशान गया डूबते डूबते जब उन की तरफ़ ध्यान गया ले के साहिल की तरफ़ ख़ुद मुझे तूफ़ान गया हर बुलंदी मुझे पस्ती की तरह आई नज़र जब मेरा गुंबद-ए-ख़ज़रा की तरफ़ ध्यान गया ग़ैब का जानने वाला उन्हें जब मैं ने कहा बात ईमान की थी कुफ़्र बुरा मान गया 'इश्क़-ए-सरकार-ए-दो-'आलम के सिवा कुछ भी नहीं ज़िंदगी ! तेरी हक़ीक़त को मैं पहचान गया बस इरादे ही से मौजों का हुआ काम तमाम या नबी कहना ही चाहा था कि तूफ़ान गया शुक्र सद-शुक्र कि मौत आई दर-ए-अहमद पर अब मदीने से कहीं जाने का इमकान गया जैसे बरसों की मुलाक़ात रही हो उन से क़ब्र में देखते ही मैं उन्हें पहचान गया हाथ मलती ही रही देख के दोज़ख़, यारो ! ले के जन्नत में हमें तयबा का सुलतान गया देखो किस शान से कर्बल का वो मेहमान गया नेज़े की नोक पे पढ़ता हुआ क़ुरआन गया ना'त-गोई का मैं ममनून-ए-करम हूँ, ए'जाज़ ! ख़ुल्द में ले के मुझे ना'त...

तुम से जो गुरेज़ाँ है फ़रज़ाना वो दीवाना / Tum Se Jo Gurezan Hai Farzana Wo Deewana

तुम से जो गुरेज़ाँ है फ़रज़ाना वो दीवाना शैदा जो हुआ तुम पर दीवाना वो फ़रज़ाना आ जा दिल-ए-वीराँ में, तेरा हो ये काशाना लिल्लाह करम फ़रमा, ऐ जल्वा-ए-जानाना ! आँखों से पिला वो मय, सर-मस्त रहूँ जिस से भर दे मेरा पैमाना, ऐ साक़ी-ए-मय-ख़ाना ! वो अब्र-ए-बहार आया, हर शय पे निखार आया ला जल्द, मेरे साक़ी ! दे साग़र-ओ-पैमाना क्या रात के पर्दे से, चुपके से सहर निकली या जान-ए-दिल-आरा ने ज़ुल्फ़ों में किया शाना बद-कार सही लेकिन बंदा हूँ तेरे दर का महरूम न रख मुझ को, ऐ शान-ए-करीमाना ! यूँ थाम के दामन को मचला है सर-ए-महशर देखे कोई अख़्तर का ये नाज़-ए-ग़ुलामाना शायर: मुफ़्ती अख़्तर रज़ा ख़ान ना'त-ख़्वाँ: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी tum se jo gurezaa.n hai farzaana wo deewana shaida jo huaa tum par deewana wo farzaana aa jaa dil-e-weeraa.n me.n, tera ho ye kaashaana lillah karam farma, ai jalwa-e-jaanaana ! aankho.n se pila wo mai, sar-mast rahu.n jis se bhar de mera paimaana, ai saaqi-e-mai-KHaana ! wo abr-e-bahaar aaya, har shai pe nikhaar aaya laa jald, mere saaqi !...

लब पे जब नाम-ए-मुहम्मद की सदा आती है / Lab Pe Jab Naam-e-Muhammad Ki Sada Aati Hai

लब पे जब नाम-ए-मुहम्मद की सदा आती है उन के दरबार से रहमत की घटा आती है हिज्र-ए-सरकार के ग़म में जो क़ज़ा आती है उस कफ़न के लिए जन्नत से रिदा आती है मर गया 'इश्क़-ए-मुहम्मद जो बसा कर दिल में क़ब्र में उस की मदीने से हवा आती है क़ब्र में बोले नकीरैन कि सोने दो इसे इस की रग रग से हमें बू-ए-वफ़ा आती है उन का बीमार हूँ छेड़ो न, तबीबो ! मुझ को मेरी हर रोज़ मदीने से दवा आती है भीनी ख़ुश्बू से महक जाती हैं गलियाँ, गुलज़ार ! उन के रौज़े से लिपट कर जो सबा आती है शायर: सय्यिद शाह गुलज़ार इस्माईल वास्ती क़ादरी ना'त-ख़्वाँ: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी lab pe jab naam-e-muhammad ki sada aati hai un ke darbaar se rahmat ki ghaTa aati hai hijr-e-sarkaar ke Gam me.n jo qaza aati hai us kafan ke liye jannat se rida aati hai mar gaya 'ishq-e-muhammad jo basa kar dil me.n qabr me.n us ki madine se hawa aati hai qabr me.n bole nakeerain ki sone do ise is ki rag rag se hame.n boo-e-wafa aati hai un ka beemaar hu.n chhe.Do na, tabeebo ! mujh ko meri har roz madine se ...

कौनैन में उस मूनिस-ओ-ग़म-ख़्वार के जैसा सरकार के जैसा | महबूब-ए-ख़ुदा नबियों के सरदार के जैसा सरकार के जैसा / Kaunain Mein Us Moonis-o-Ghamkhwar Ke Jaisa | Mahboob-e-Khuda Nabiyon Ke Sardar Ke Jaisa Sarkar Ke Jaisa

कौनैन में उस मूनिस-ओ-ग़म-ख़्वार के जैसा, सरकार के जैसा है कौन भला अहमद-ए-मुख़्तार के जैसा, सरकार के जैसा महबूब-ए-ख़ुदा नबियों के सरदार के जैसा, सरकार के जैसा है कौन भला अहमद-ए-मुख़्तार के जैसा, सरकार के जैसा क्या इस में अजब कह दिया सिदरा के मकीं ने, जिब्रील-ए-अमीं ने देखा न कोई सय्यिद-ए-अबरार के जैसा, सरकार के जैसा सिद्दीक़ हों, फ़ारूक़ हों, 'उस्मान-ए-ग़नी हों या मौला 'अली हों है यार कहाँ दुनिया में इन चार के जैसा, सरकार के जैसा वो मौला 'अली शेर-ए-ख़ुदा फ़ातेह-ए-ख़ैबर दामाद-ए-पयम्बर लाए तो कोई हैदर-ए-कर्रार के जैसा, सरकार के जैसा ऐ चाँद ! तेरा हुस्न-ओ-जमाल अपनी जगह है, बिलाल अपनी जगह है आया न कोई इन के ख़रीदार के जैसा, सरकार के जैसा ऐ बाग़-ए-इरम ! तेरी बहारों में नहीं है, हज़ारों में नहीं है तयबा के हसीं उन गुल-ओ-गुलज़ार के जैसा, सरकार के जैसा पलता है सदा आप के टुकड़ों पे ज़माना, हसनैन के नाना ! दरबार कहाँ आप के दरबार के जैसा, सरकार के जैसा इस 'उर्स के मौक़े' पे समाँ ख़ूब बँधा आज, दूल्हा है बना ताज ये नूर चमकता है उस अनवार के जैसा, सरकार के जैसा ऐ साइलो ! दामान-ए-निय...

हर इक साँस सल्ले-अला पढ़ रही है / Har Ek Sans Salle Ala Padh Rahi Hai

हर इक साँस सल्ले-'अला पढ़ रही है, मैं नाम-ए-मुहम्मद लिए जा रहा हूँ मुझे मौत आए दर-ए-मुस्तफ़ा पर, इसी आरज़ू में जिए जा रहा हूँ मुझे मिल गई है शराब-ए-मोहब्बत, किसी जाम की अब नहीं है ज़रूरत पिया ग़ौस-ए-आ'ज़म से अहमद रज़ा ने, मैं अहमद रज़ा से पिए जा रहा हूँ ये जो मस्लक-ए-आ'ला हज़रत है, लल्ला ! यही दीन-ए-हक़ की है पहचान वल्लाह जो इस से कटा वो हमारा नहीं है, ये पैग़ाम हर-सू दिए जा रहा हूँ ज़माने में कुछ भी नहीं इस से बढ़ कर, कि हिस्से में आई मेरे ना'त-ए-सरवर वो नज़र-ए-'इनायत किए जा रहे हैं, मैं गुलज़ार ! मिदहत किए जा रहा हूँ शायर: सय्यिद शाह गुलज़ार इस्माइल वास्ती क़ादरी (गुलज़ार-ए-मिल्लत) ना'त-ख़्वाँ: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी har ik saans salle-'ala pa.Dh rahi hai mai.n naam-e-muhammad liye jaa raha hu.n mujhe maut aae dar-e-mustafa par isi aarzoo me.n jiye jaa raha hu.n mujhe mil gai hai sharaab-e-mohabbat kisi jaam ki ab nahi.n hai zaroorat piya Gaus-e-aa'zam se ahmad raza ne mai.n ahmad raza se piye jaa raha hu.n ye jo maslak-e-aa...

ज़बाँ से क्या मैं कहूँ आप से छुपा क्या है / Zaban Se Kya Main Kahun Aap Se Chhupa Kya Hai

ज़बाँ से क्या मैं कहूँ आप से छुपा क्या है वो जानते हैं मेरे दिल का माजरा क्या है नबी के 'इश्क़ की लज़्ज़त बिलाल से पूछो बिलाल जानते हैं 'इश्क़-ए-मुस्तफ़ा क्या है कहा ख़ुदा ने सर-ए-हश्र बख़्श दी उम्मत मेरे हबीब बता और चाहता क्या है गले में देखा जो पट्टा तेरी ग़ुलामी का कहा नकीरों ने अब इस से पूछना क्या है मेरे हुज़ूर को ख़ुद जैसा बोलने वाले ! तू उन की ज़ात के बारे में जानता क्या है ? वो क्या बताएगा क़ुरआन के रुमूज़ भला जिसे पता ही नहीं शान-ए-मुस्तफ़ा क्या है सुना के नेज़े पे क़ुरआँ 'अली के बेटे ने बता दिया है फ़ना क्या है और बक़ा क्या है ना'त-ख़्वाँ: हाफ़िज़ अहसन क़ादरी सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी zabaa.n se kya mai.n kahu.n aap se chhupa kya hai wo jaante hai.n mere dil ka maajra kya hai nabi ke 'ishq ki lazzat bilaal se poochho bilaal jaante hai.n 'ishq-e-mustafa kya hai kaha KHuda ne sar-e-hashr baKHsh di ummat mere habeeb bata aur chaahta kya hai gale me.n dekha jo paTTa teri Gulaami ka kaha nakeero.n ne ab is se poochhna kya hai mere huzoor ...

फ़ख़्र-ए-आदम रश्क-ए-ईसा आप हैं | मुस्तफ़ा-ए-ज़ात-ए-यकता आप हैं तज़मीन के साथ / Fakhr-e-Aadam Rashk-e-Isa Aap Hain | Mustafa-e-Zaat-e-Yakta Aap Hain With Tazmeen

फ़ख़्र-ए-आदम रश्क-ए-'ईसा आप हैं आप हैं हाँ मेरे आक़ा आप हैं ख़ालिक़-ए-अकबर का जल्वा आप हैं मुस्तफ़ा-ए-ज़ात-ए-यकता आप हैं यक ने जिस को यक बनाया, आप हैं यूसुफ़-ओ-या'क़ूब और यहया नहीं नूह-ओ-यूनुस, 'ईसा-ओ-मूसा नहीं सब हैं आ'ला पर कोई ऐसा नहीं आप जैसा कोई हो सकता नहीं अपनी हर ख़ूबी में तन्हा आप हैं का'बा-ए-सर, क़िब्ला-गाह-ए-'आशिक़ाँ ये ज़मीन-ओ-आसमाँ, कौन-ओ-मकाँ ऐ हबीब-ए-किब्रिया फ़ख़्र-ए-ज़माँ ! आप की ख़ातिर बनाए दो जहाँ अपनी ख़ातिर जो बनाया, आप हैं बेकस-ओ-मजबूर का सुल्ताँ तुई हसरत-ओ-चाहत तड़प अरमाँ तुई चारा-ए-ग़म, दर्द का दरमाँ तुई जाँ तुई जानाँ क़रार-ए-जाँ तुई जान-ए-जाँ जान-ए-मसीहा आप हैं आप मंज़िल, रह-रव-ए-मंज़िल हूँ मैं फ़ख़्र है कि तालिब-ए-कामिल हूँ मैं रहम कीजे, आप का बिस्मिल हूँ मैं आप से ख़ुद आप का साइल हूँ मैं जान-ए-जाँ ! मेरी तमन्ना आप हैं कौन रखता है भला इतना ख़याल जो भी आया हो गया है माला-माल कीजिए सय्यद वसी को भी निहाल बर दरत आमद गदा बहर-ए-सुवाल हो भला अख़्तर का, दाता आप हैं कलाम: मुफ़्ती अख़्तर रज़ा ख़ान तज़मीन: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी ना'...

तुम्हारे रुख़ पर जमी हैं आँखें मैं कैसे रुख़ से हटाऊँ अखियाँ / Tumhare Rukh Par Jami Hain Aankhen Main Kaise Rukh Se Hataun Akhiyan

तुम्हारे रुख़ पर जमी हैं आँखें, मैं कैसे रुख़ से हटाऊँ अखियाँ क़सम ख़ुदा की बड़े हसीं हो, मैं कैसे आख़िर मिलाऊँ अखियाँ नमाज़ पढ़ने को मैं था आया, तुम्हें जो देखा तो पढ़ ली मैं ने तुम्हारी सूरत है मेरे आगे, मैं कैसे अपनी झुकाऊँ अखियाँ जिधर भी जाऊँ, जिधर भी देखूँ, तुम्हारे चर्चे, तुम्हारे जल्वे तुम्हीं बसे हो मेरी नज़र में, किसी को क्यूँ मैं दिखाऊँ अखियाँ ये बात, हाकिम ! मैं सोचता हूँ कि ख़ुद मुसव्विर ने पूछा होगा मैं नक़्श तेरे बना रहा हूँ, बताओ कैसी बनाऊँ अखियाँ शायर: अहमद अली हाकिम ना'त-ख़्वाँ: अहमद अली हाकिम मुहम्मद आदिल क़ुरैशी सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी tumhaare ruKH par jami hai.n aankhe.n mai.n kaise ruKH se haTaau.n akhiyaa.n qasam KHuda ki ba.De hasee.n ho mai.n kaise aaKHir milaau.n akhiyaa.n namaaz pa.Dhne ko mai.n tha aaya tumhe.n jo dekha to pa.Dh li mai.n ne tumhaari soorat hai mere aage mai.n kaise apni jhukaau.n akhiyaa.n jidhar bhi jaau.n, jidhar bhi dekhu.n tumhaare charche, tumhaare jalwe tumhi.n base ho meri nazar me.n kisi ko kyu.n mai.n ...